GLIMPSES OF WORLD BOOK AND COPYRIGHT DAY CELEBRATION 2026
23rd April 2026
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विश्व पुस्तक एवं कॉपीराइट दिवस
23 अप्रैल 2026
पीएम श्री केन्द्रीय विद्यालय नं. 1, उधमपुर में 23 अप्रैल 2026 को विश्व पुस्तक
एवं कॉपीराइट दिवस बड़े उत्साह एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। यह दिवस प्रतिवर्ष
UNESCO द्वारा पुस्तकों के प्रति प्रेम, पठन-पाठन की संस्कृति को प्रोत्साहन देने तथा
लेखकों के अधिकारों की रक्षा के उद्देश्य से मनाया जाता है।
इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों
में पुस्तकों के प्रति रुचि जागृत करना, पढ़ने की आदत को प्रोत्साहित करना एवं ज्ञान
को जीवन का अभिन्न अंग बनाने के लिए प्रेरित करना था। साथ ही विद्यार्थियों को लेखकों
एवं प्रकाशकों के कॉपीराइट अधिकारों के बारे में भी जागरूक किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के प्राचार्य महोदय
के उद्बोधन से हुआ। उन्होंने पुस्तकों को जीवन का सबसे अच्छा मित्र बताते हुए विद्यार्थियों
को नियमित पठन की प्रेरणा दी। विद्यालय के पुस्तकालय को विशेष रूप से सजाया गया एवं
विद्यार्थियों को विभिन्न प्रकार की पुस्तकों से परिचित कराया गया।
इस अवसर पर विद्यार्थियों ने पुस्तक समीक्षा,
कविता पाठ, निबंध लेखन एवं पोस्टर निर्माण प्रतियोगिताओं में बढ़-चढ़कर भाग लिया। कक्षा
6 से 12 तक के विद्यार्थियों ने अपनी पसंदीदा पुस्तकों पर विचार साझा किए एवं अन्य
सहपाठियों को भी उन्हें पढ़ने के लिए प्रेरित किया।
इस आयोजन ने विद्यार्थियों में पुस्तकों के प्रति
अनुराग एवं ज्ञान अर्जन की ललक को और अधिक प्रगाढ़ किया। विद्यालय परिवार ने संकल्प
लिया कि पठन-पाठन की यह संस्कृति सदैव जीवंत रहेगी।
"एक पुस्तक जो आपने पढ़ी है वह कभी आपको
नहीं छोड़ती।"
— पीएम श्री केन्द्रीय विद्यालय
नं. 1, उधमपुर
14 अप्रैल 2026 को देश 'भारत रत्न' 'संविधान निर्माता' बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर की 135वीं जयंती मनाएगा। एक सामाजिक-राजनीतिक सुधारक के रूप में आंबेडकर की विरासत का आधुनिक भारत पर गहरा असर हुआ है। भारत के सामाजिक, आर्थिक नीतियों और कानूनी ढांचों में अगर आज कहीं भी प्रगतिशील बदलाव दिख रहे हैं तो इसके पीछे कहीं न कहीं आंबेडकर के वो विचार हैं जो उन्होंने 60 से 75 साल पहले दिए। कहने में कोई गुरेज नहीं कि डॉ. आंबेडकर के वे विचार आज भी प्रासंगिक हैं।
Dr.B.R AMBEDKAR BOOK (His life and work)
Click on below link
http://mea.gov.in/ambedkar-audio-files.htm
* 14 अप्रैल 2015 को, गुगल ने अपने होमपेज डुडल के माध्यम से अम्बेडकर के 124 वें जन्मदिन का जश्न मनाया था। यह डूडल भारत, अर्जेंटीना, चिली, आयरलैंड, पेरू, पोलैंड, स्वीडन और यूनाइटेड किंगडम में दिखाया गया था।
Source:- https://hindi.starsunfolded.com/bhimrao-ramji-ambedkar-hindi/
👉डॉ बी. आर. अम्बेडकर के विचार :
• जीवन लम्बा होने की बजाय महान होना चाहिए।
• मैं किसी समुदाय की प्रगति, महिलाओं ने जो प्रगति हांसिल की है उससे मापता हूँ।
• एक सफल क्रांति के लिए सिर्फ असंतोष का होना पर्याप्त नहीं है। जिसकी आवश्यकता है वो है न्याय एवं राजनीतिक और सामाजिक अधिकारों में गहरी आस्था।
• लोग और उनके धर्म सामाजिक मानकों द्वारा; सामजिक नैतिकता के आधार पर परखे जाने चाहिए। अगर धर्म को लोगो के भले के लिए आवशयक मान लिया जायेगा तो और किसी मानक का मतलब नहीं होगा।
• हमारे पास यह स्वतंत्रता किस लिए है ? हमारे पास ये स्वत्नत्रता इसलिए है ताकि हम अपने सामाजिक व्यवस्था, जो असमानता, भेद-भाव और अन्य चीजों से भरी है, जो हमारे मौलिक अधिकारों से टकराव में है को सुधार सकें।
• सागर में मिलकर अपनी पहचान खो देने वाली पानी की एक बूँद के विपरीत, इंसान जिस समाज में रहता है वहां अपनी पहचान नहीं खोता। इंसान का जीवन स्वतंत्र है। वो सिर्फ समाज के विकास के लिए नहीं पैदा हुआ है, बल्कि स्वयं के विकास के लिए पैदा हुआ है।
• आज भारतीय दो अलग -अलग विचारधाराओं द्वारा शोषित हो रहे हैं . उनके राजनीतिक आदर्श जो संविधान के प्रस्तावना में इंगित हैं वो स्वतंत्रता , समानता , और भाई -चारे को स्थापित करते हैं . और उनके धर्म में समाहित सामाजिक आदर्श इससे इनकार करते हैं।
• राजनीतिक अत्याचार सामाजिक अत्याचार की तुलना में कुछ भी नहीं है और एक सुधारक जो समाज को खारिज कर देता है वो सरकार को ख़ारिज कर देने वाले राजनीतिज्ञ से कहीं अधिक साहसी हैं।
बी. आर. अम्बेडकर का जीवन परिचय पढ़ने ले लिए दिए क्लिक करें
👉https://www.quickhindi.in/2020/04/dr-bhimrao-ambedkar-biography-in-hindi.html
👉 https://www.bharatdarshan.co.nz/magazine/article/child/170/ambedkar-biography.html
👉 https://www.1hindi.com/dr-bhimrao-ambedkar-life-history-hindi/
National Library Week (14-20 November, 2025)
राष्ट्रीय पुस्तकालय सप्ताह पर आधारित प्रश्नोत्तरी में भाग लेने हेतु दिए गए लिंक पर क्लिक करें।
https://forms.gle/osxt3LEnNHFjxJgs8
The theme for National Library Week 2025, "Drawn to the Library"!"
Aim of National Library Week Celebrated in India
Bringing awareness among the readers, students, teachers about the importance of libraries in acquiring knowledge and information.
National Library Week is celebrated from 14th-20th November every year. Special morning assembly programmes and different competitions are organized in connection with National Library Week. On this auspicious occasion some presentations related to the library, has been presented by the students and teachers in Morning Assembly as well as library with the help of Reader’s Club. The celebration of National Library Week is a way to promote the joy of reading, appreciate the importance of the library services among children by bringing their school libraries into the spotlight.
Ayyanki Venkata Ramanaiah, who is recognized as “The Architect of Public Library
Movement in India”, states that the 1912 meeting in Madras led to the forming of the Indian Library Association. The ILA is said to have declared 14 November as the National Library Day since 1968. 14th to 20th November is being celebrated as the National Library Week all over India and various programs are held to enhance readers’ awareness about libraries.
राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय
👉https://ndl.education.gov.in/language-books
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👉 https://ndl.education.gov.in/language-books
राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय, शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा शुरू की गई एक अभिनव परियोजना है। यह एक निःशुल्क डिजिटल पुस्तकालय के रूप में कार्य करता है और भारत के युवा मस्तिष्कों के लिए विशेष रूप से तैयार ज्ञान और कहानियों के राष्ट्रीय भंडार के रूप में कार्य करता है।
इस डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म का उद्देश्य पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देना और युवाओं में अपनी विरासत और उपलब्धियों के प्रति गर्व और जिज्ञासा की भावना को बढ़ावा देना है। इसका उद्देश्य आने वाली पीढ़ियों के लिए ज्ञान का एक केंद्रीय स्रोत बनना भी है।
राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय गुणवत्तापूर्ण पुस्तकों की एक विस्तृत श्रृंखला प्रदान करता है जो किसी भी स्थान, भाषा, शैली या स्तर की परवाह किए बिना उपलब्ध हैं और विभिन्न उपकरणों पर उपलब्ध हैं। पुस्तकालय को चार आयु-विशिष्ट श्रेणियों में विभाजित किया गया है: 3-8, 8-11, 11-14, और 14+ वर्ष, जिसमें कथा साहित्य, गैर-कथा साहित्य, जीवनी, कविता, क्लासिक्स, कॉमिक्स और उपन्यास जैसी गैर-शैक्षणिक पुस्तकों का विविध संग्रह है। यह संग्रह भारतीय इतिहास, संस्कृति, वैज्ञानिक प्रगति और राष्ट्र की पहचान के अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं पर केंद्रित है।
राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय एप्लिकेशन वेब, एंड्रॉइड और आईओएस उपयोगकर्ताओं के लिए उपलब्ध होगा। इसमें साहसिक, रहस्य, हास्य, साहित्य, कथा साहित्य, क्लासिक्स, नॉन-फिक्शन, स्व-सहायता, इतिहास, आत्मकथाएँ, कॉमिक्स, चित्र पुस्तकें, विज्ञान और कविता जैसी विविध विधाएँ शामिल होंगी। इसकी सामग्री 'वसुधैव कुटुम्बकम' या 'विश्व एक परिवार है' की अवधारणा के अनुरूप सांस्कृतिक जागरूकता, राष्ट्रीय गौरव और सहानुभूति को बढ़ावा देने के लिए तैयार की गई है।
एक अद्वितीय डिजिटल पुस्तकालय के रूप में, राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय भारत के बच्चों और किशोरों में पढ़ने के प्रति आजीवन जुनून को पोषित करने के लिए समर्पित है। यह 45 से अधिक प्रतिष्ठित प्रकाशकों की 3,000 से अधिक गैर-शैक्षणिक पुस्तकों तक पहुँच प्रदान करता है, जो अंग्रेजी सहित 22 से अधिक भाषाओं में उपलब्ध हैं। यह पहल 3-8, 8-11, 11-14 और 14+ आयु वर्ग के पाठकों के लिए पुस्तकों को वर्गीकृत करके राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 का समर्थन करती है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि गुणवत्तापूर्ण साहित्य भौगोलिक, भाषाई और सुगम्यता की बाधाओं को पार करते हुए सभी के लिए उपलब्ध हो।