Welcome to The Library blog of PM Shri KV 1 Udhampur

DIFFERENT ACTIVITIES OF LIBRARY

पुस्तकालय गतिविधियों की कुछ झलकियाँ

पुस्तकालय गतिविधियों की कुछ झलकियाँ

Different Activity of Library

LATEST NEWS OF VIDYALAYA

Announcements

1. RASHTRIYA EKTA PARV 2026 WILL BE CELEBRATED FROM 31ST JULY TO 1 AUGUST.
2. PTM WILL BE CONDUCTED ON 25.07.2026 IN ONLINE MODE.

Tuesday, August 18, 2026

Reader of the Month

 


Independence Day Celebration (15 August, 2026)

 

Independence Day Celebration (15 August, 2026)










Library PM SHRI K.V NO.1  UDHAMPUR organized  Speech and poster making competition on "Independence Day 2026" . Theme of the poster making was 'Our Real Heroes' On the Occasion of our National Festival,  to check students how much they really know about struggle for Independence.Students partcipated in the competition with full enthusiasm and gave speech and made poster to give tribute to our freedom fighters. This activity lighten up the spirit of nationality and patriotism among students.

Glimpses of Activity :


























Wednesday, August 12, 2026

National Librarians' Day (12 August 2026)

 

National Librarians' Day (12 August 2026)





August 12th is being celebrated as National Librarians’ Day in India, in remembrance of birthday of national professor of library science, Padmashree Dr. S. R. Ranganathan (1892-1972), who had spearheaded library development in India.


BIOGRAPHY:-Dr. S.R. Ranganatan (1892 1972)


👉Birth:- Shiyali in Tanjavoor (Tamilnadu) on 09th August,1892.


👉Family Status:- Married in 1907 with Rukmini. but she died in an accident on 13 November 1928. Ranganathan married again in 1929 to Sarada in December 1929. Ranganathan was blessed with only one son, Shri R. Yogeswar, born in 1932.


👉Education:-Ranganathan attended the S.M. Hindu High School at Shiyali and passed Matriculation examination in 1908/1909. Ranganathan passed the examination in First Class. Ranganathan passed B.A. with a first class in March/April 1913. In June. Ranganathan passed M.A. in 1916 and he wanted to be a teacher in Mathematics.


👉Profession:-Appointed as a subordinate education service and worked as Assistant Lecture in Govt. College (Mangalore & Coimbatore), 1917. Between 1917 and 1921. In July 1921, joined the Presidency College, Madras as Assistant Professor of Mathematics. The first Librarian of Madras University-January, 1924. 



Literature and Books on ‘Library Science’

1.Five Laws of Library Science (1931).

2. Colon Classification (1933).

3.Classified Catalogue Code (1934).

4.Principal of Library Management.


Five Laws of Library Science’ (1931).


1.Books are for use.

2.Every reader his/her books.

3.Every books its reader.

4.Save the time of reader.

5.Library is a growing organism.


Death:- 27th September, 1972 after a fruitful 80 years 


LIBRARIAN PM SHRI KV NO.1 UDHAMPUR





Tuesday, July 14, 2026

Display of the Book "Constitution of India" in the Library

 

Display of the Book "Constitution of India" in the Library

Kendriya Vidyalaya No. 1, Udhampur

The Vidyalaya Library of Kendriya Vidyalaya No. 1, Udhampur organized a special book display on the "Constitution of India" to promote constitutional awareness among students. The objective of the display was to familiarize students with the values, principles, and ideals enshrined in the Constitution, which is the supreme law of the country.

During the activity, students were introduced to the Preamble, Fundamental Rights, Fundamental Duties, and the Directive Principles of State Policy. The librarian explained the significance of the Constitution, its role in safeguarding democracy, justice, liberty, equality, and fraternity, and how it guides the functioning of the nation. Students were encouraged to read the book to gain a deeper understanding of their rights and responsibilities as responsible citizens. The Constitution establishes the framework of the Government of India and embodies the ideals on which the nation is built.

The display generated great interest among students, who actively interacted with the books and asked questions about the making of the Constitution and the contributions of the members of the Constituent Assembly. Such library initiatives help inculcate constitutional values, develop civic awareness, and inspire students to uphold the democratic principles of the nation.

The programme concluded with a message encouraging every student to read and respect the Constitution of India and to contribute positively towards building a just, inclusive, and responsible society.


Glimpses 







Friday, May 15, 2026

GLIMPSES OF CHILDREN BOOK WEEK CELEBRATION 2026

 

बाल पुस्तक सप्ताह

                                                                  4 मई से 10 मई 2026




पीएम श्री केन्द्रीय विद्यालय नं. 1, उधमपुर में बाल पुस्तक सप्ताह का आयोजन 4 मई से 10 मई 2026 तक अत्यंत उत्साह एवं उमंग के साथ किया गया। यह सप्ताह बच्चों में पुस्तकों के प्रति प्रेम जगाने, पढ़ने की आदत को प्रोत्साहित करने तथा बाल साहित्य की समृद्ध विरासत से परिचित कराने के लिए समर्पित था।

इस सप्ताह का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को बाल साहित्य से जोड़ना, उनकी कल्पनाशीलता एवं सृजनात्मकता को विकसित करना तथा पुस्तकों को उनका प्रिय साथी बनाना था। विद्यालय परिवार का यह प्रयास था कि प्रत्येक बच्चा पुस्तकों की जादुई दुनिया में प्रवेश करे और ज्ञान व आनंद का अनुभव करे।

बाल पुस्तक सप्ताह का शुभारंभ 4 मई 2026 को विद्यालय के प्राचार्य महोदया के प्रेरणादायक उद्बोधन से हुआ। जिसमें प्राचार्य महोदया ने कहा कि पुस्तकें हमारी सच्ची मित्र होती हैं और बचपन में पढ़ी गई कहानियाँ व कविताएँ जीवन भर हमारे व्यक्तित्व को संवारती हैं।

इस सप्ताह में विभिन्न आयु वर्गों के विद्यार्थियों के लिए अनेक रोचक एवं ज्ञानवर्धक गतिविधियों का आयोजन किया गया

 कहानी सुनाओ प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने अपनी मनपसंद कहानियाँ रोचक ढंग से प्रस्तुत कीं। 'मेरी कल्पना की कहानी' विषय पर लघु कथाएँ लिखी गईं।

'एक पुस्तक — एक मित्र' अभियान के अंतर्गत बच्चों ने अपनी पुस्तकें परस्पर साझा कीं।

यह बाल पुस्तक सप्ताह विद्यार्थियों के जीवन में पुस्तकों का महत्त्व स्थापित करने में अत्यंत सफल रहा। विद्यालय परिवार — प्राचार्य, शिक्षकगण, अभिभावक एवं विद्यार्थी — सभी के सहयोग से यह आयोजन यादगार बन गया।

 

"बच्चों को किताबें दीजिए — आप उन्हें पंख दे रहे हैं।"

— केन्द्रीय विद्यालय नं. 1, उधमपुर










Wednesday, May 6, 2026

GLIMPSES OF WORLD BOOK AND COPYRIGHT DAY CELEBRATION 2026

 GLIMPSES OF WORLD BOOK AND COPYRIGHT DAY CELEBRATION 2026

23rd April 2026










CELEBRATION OF WORLD BOOK AND COPY RIGHT DAY 2026

 


विश्व पुस्तक एवं कॉपीराइट दिवस

23 अप्रैल 2026

 

पीएम श्री केन्द्रीय विद्यालय नं. 1, उधमपुर में 23 अप्रैल 2026 को विश्व पुस्तक एवं कॉपीराइट दिवस बड़े उत्साह एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। यह दिवस प्रतिवर्ष UNESCO द्वारा पुस्तकों के प्रति प्रेम, पठन-पाठन की संस्कृति को प्रोत्साहन देने तथा लेखकों के अधिकारों की रक्षा के उद्देश्य से मनाया जाता है।

इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में पुस्तकों के प्रति रुचि जागृत करना, पढ़ने की आदत को प्रोत्साहित करना एवं ज्ञान को जीवन का अभिन्न अंग बनाने के लिए प्रेरित करना था। साथ ही विद्यार्थियों को लेखकों एवं प्रकाशकों के कॉपीराइट अधिकारों के बारे में भी जागरूक किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के प्राचार्य महोदय के उद्बोधन से हुआ। उन्होंने पुस्तकों को जीवन का सबसे अच्छा मित्र बताते हुए विद्यार्थियों को नियमित पठन की प्रेरणा दी। विद्यालय के पुस्तकालय को विशेष रूप से सजाया गया एवं विद्यार्थियों को विभिन्न प्रकार की पुस्तकों से परिचित कराया गया।

इस अवसर पर विद्यार्थियों ने पुस्तक समीक्षा, कविता पाठ, निबंध लेखन एवं पोस्टर निर्माण प्रतियोगिताओं में बढ़-चढ़कर भाग लिया। कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों ने अपनी पसंदीदा पुस्तकों पर विचार साझा किए एवं अन्य सहपाठियों को भी उन्हें पढ़ने के लिए प्रेरित किया।

इस आयोजन ने विद्यार्थियों में पुस्तकों के प्रति अनुराग एवं ज्ञान अर्जन की ललक को और अधिक प्रगाढ़ किया। विद्यालय परिवार ने संकल्प लिया कि पठन-पाठन की यह संस्कृति सदैव जीवंत रहेगी।

 

"एक पुस्तक जो आपने पढ़ी है वह कभी आपको नहीं छोड़ती।"

पीएम श्री केन्द्रीय विद्यालय नं. 1, उधमपुर


GLIMPSES OF AMBEDKAR JAYANTI CELEBRATION 2026

 GLIMPSES OF AMBEDKAR JAYANTI CELEBRATION 2026 







Monday, April 13, 2026

Ambedkar Jayanti Celebration 2026 (14.04.2026)

  

 






14 अप्रैल 2026 को देश 'भारत रत्न' 'संविधान निर्माता' बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर की 135वीं जयंती मनाएगा एक सामाजिक-राजनीतिक सुधारक के रूप में आंबेडकर की विरासत का आधुनिक भारत पर गहरा असर हुआ है। भारत के सामाजिक, आर्थिक नीतियों और कानूनी ढांचों में अगर आज कहीं भी प्रगतिशील बदलाव दिख रहे हैं तो इसके पीछे कहीं न कहीं आंबेडकर के वो विचार हैं जो उन्होंने 60 से 75 साल पहले दिए। कहने में कोई गुरेज नहीं कि डॉ. आंबेडकर के वे विचार आज भी प्रासंगिक हैं

Dr.B.R AMBEDKAR BOOK (His life and work)

Click on below link


http://mea.gov.in/ambedkar-audio-files.htm


👉 डॉ भीमराव अम्बेडकर से जुड़ी कुछ रोचक जानकारियाँ

* जन्म- भारत प्रांत (अब मध्य प्रदेश में) सैन्य छावनी “महू” में एक मराठी परिवार में हुआ था। वह रामजी मालोजी (ब्रिटिश सेना में सूबेदार) और भीमाबाई की 14 वीं संतान थे।

* भीमराव अम्बेडकर हिंदू “महार” जाति से संबंध रखते थे, जिसे समाज में अछूत जाति कहा जाता था। बचपन से ही भीमराव गौतम बुद्ध की शिक्षा से प्रभावित थे। पढ़ाई में सक्षम होने के बावजूद अनुसूचित जाति से संबंधित होने के कारण उन्हें सामाजिक प्रतिरोध का सामना करना पड़ता था। 

* वर्ष 1897 में, भीमराव अपने परिवार साथ मुंबई चले गए और वहां एल्फिंस्टन हाई स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की। जहां अम्बेडकर एक मात्र अस्पृश्य छात्र थे।

* अप्रैल 1906 में, जब वह 15 वर्ष के थे, तब उनका विवाह नौ वर्ष की लड़की रमाबाई से हुआ।

* वर्ष 1907 में, उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की और अगले वर्ष एल्फिंस्टन कॉलेज में प्रवेश किया, जो कि बॉम्बे विश्वविद्यालय से संबंधित था और ऐसा करने वाले वह पहले अस्पृश्य छात्र बने। 

* वर्ष 1913 में, उन्हें सयाजीराव गायकवाड़ तृतीय (बड़ौदा के गायकवाड़) द्वारा स्थापित एक योजना के तहत न्यूयॉर्क स्थित कोलंबिया विश्वविद्यालय में स्नातकोत्तर शिक्षा के अवसर प्रदान करने हेतू तीन साल के लिए ₹755 प्रति माह बड़ौदा राज्य की छात्रवृत्ति प्रदान की गई थी। जिसके चलते 22 साल की उम्र में वह संयुक्त राज्य अमेरिका चले गए।

* भीमराव अम्बेडकर जॉन डेवी के लोकतंत्र निर्माण कार्य से काफी प्रभावित थे।  9 मई को, उन्होंने मानव विज्ञानी अलेक्जेंडर गोल्डनवेइज़र द्वारा आयोजित एक सेमिनार में “भारत में जातियां: प्रणाली, उत्पत्ति और विकास” पर एक लेख प्रस्तुत किया, जो उनका पहला प्रकाशित कार्य था। 

* अक्टूबर 1916 में, डॉ॰ भीमराव अम्बेडकर लंदन चले गए और वहाँ “ग्रेज़ इन” में बैरिस्टर कोर्स (विधि अध्ययन) के लिए दाखिला लिया और साथ ही लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स में दाखिला लिया। जहां उन्होंने अर्थशास्त्र की डॉक्टरेट थीसिस पर काम करना शुरू किया। जून 1917 में, वह अपना अध्ययन अस्थायी रूप से बीच में ही छोड़ कर भारत लौट आए।

* भारत लौटने पर भीमराव बड़ौदा राज्य के सेना सचिव के रूप में कार्य करने के लगे। जहां कुछ दिन बाद उन्हें पुनः भेदभाव का सामना करना पड़ा। अंत में, बाबा साहेब ने नौकरी छोड़ दी और एक निजी ट्यूटर और एक लेखाकार के रूप में काम करने लगे।

* वर्ष 1918 में, वह मुंबई में सिडेनहम कॉलेज ऑफ कॉमर्स एंड इकोनॉमिक्स में राजनीतिक अर्थव्यवस्था (Political Economy) के प्रोफेसर बने। जहां उनका अन्य प्रोफेसरों के साथ पानी पीने के जॉग को साझा करने पर विरोध किया गया।

* भारत सरकार अधिनियम 1919 को तैयार कर रही “साउथबरो समिति” के समक्ष जब भीमराव अम्बेडकर को गवाही देने के लिए आमंत्रित किया गया। तब अम्बेडकर ने दलितों और अन्य धार्मिक समुदायों के लिए पृथक निर्वाचिका (separate electorates) और आरक्षण देने की वकालत की।

* वर्ष 1920 में, उन्होंने मुंबई में साप्ताहिक “मूकनायक” के प्रकाशन का कार्य शुरू किया। जिसका इस्तेमाल अम्बेडकर रूढ़िवादी हिंदू राजनेताओं व जातीय भेदभाव से लड़ने के प्रति भारतीय राजनैतिक समुदाय की अनिच्छा की आलोचना करने के लिए करते थे।

* बॉम्बे हाईकोर्ट में कानून की प्रैक्टीस करते हुए, उन्होंने अस्पृश्यों की शिक्षा को बढ़ावा दिया। उनका पहला संगठित प्रयास “बहिष्कृत हितकारिणी सभा” की स्थापना की, जिसका उद्देश्य शिक्षा और सामाजिक-आर्थिक सुधार को बढ़ावा देना था। 

* वर्ष 1930 में, भीमराव अम्बेडकर ने कालाराम मंदिर सत्याग्रह को शुरू किया। जिसमें लगभग 15,000 स्वयंसेवको ने प्रतिभाग लिया था। यही-नहीं इस आंदोलन में जुलूस का नेतृत्व एक सैन्य बैंड ने किया था और उसमें एक स्काउट्स का बैच भी शामिल था। पहली बार पुरुष और महिलाएं भगवान का दर्शन अनुशासन में कर रहे थे। जब सभी आंदोलनकारी मंदिर के गेट तक पहुंचे, तो उन्हें गेट पर खड़े ब्राह्मण अधिकारियों द्वारा गेट बंद कर दिया गया। विरोध प्रदर्शन उग्र होने पर गेट को खोल दिया गया। जिसके परिणामस्वरूप दलितों को मंदिर में प्रवेश की इजाजत मिलने लगी। 

* वर्ष 1932 में, जब ब्रिटिशों ने अम्बेडकर के साथ सहमति व्यक्त करते हुए, अछूतों को “पृथक निर्वाचिका” देने की घोषणा की, तब महात्मा गांधी ने इसका विरोध करते हुए, पुणे की यरवदा सेंट्रल जेल में आमरण अनशन शुरु किया।

* वर्ष 1936 में, भीमराव अम्बेडकर ने “स्वतंत्र लेबर पार्टी” की स्थापना की, जिसने वर्ष 1937 में केन्द्रीय विधान सभा चुनावों मे 15 सीटें जीती थी।

* वर्ष 1941 और 1945 के बीच में उन्होंने बड़ी संख्या में बहुत सी विवादास्पद पुस्तकें और पर्चे प्रकाशित किए, जिनमे “थॉट्स ऑन पाकिस्तान” भी शामिल है। जिसमें वह मुस्लिम लीग के मुसलमानों के लिए एक अलग देश पाकिस्तान की मांग की आलोचना करते हैं। भीमराव अम्बेडकर इस्लाम और दक्षिण एशिया के रीतियों के भी बड़े आलोचक थे। उन्होने भारत विभाजन का तो पक्ष लिया, परन्तु मुस्लिमो में व्याप्त बाल विवाह की प्रथा और महिलाओं के साथ होने वाले दुर्व्यवहार की घोर निंदा की।

* 15 अगस्त 1947 में भारत की स्वतंत्रता के बाद, कांग्रेस के नेतृत्व वाली नई सरकार जब अस्तित्व मे आई तब उन्होंने भीमराव अम्बेडकर को देश के पहले कानून मंत्री के रूप में सेवा करने के लिए आमंत्रित किया।

* उसके बाद अम्बेडकर के द्वारा तैयार किए गए संविधान में व्यक्तिगत नागरिक स्वतंत्रता की संवैधानिक गारंटी और सुरक्षा प्रदान की गई है, जिसमें धर्म की आजादी, अस्पृश्यता को खत्म करना, और भेदभाव के सभी रूपों का उल्लंघन करना शामिल है। इसके अलावा उन्होंने महिलाओं के लिए व्यापक आर्थिक और सामाजिक अधिकारों के लिए तर्क दिया और अनुसूचित जातियों (एससी) और अनुसूचित जनजातियों (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के सदस्यों के लिए नागरिक सेवाओं, स्कूलों और कॉलेजों में नौकरियों के आरक्षण की व्यवस्था शुरू करने के लिए असेंबली का समर्थन जीता जो एक सकारात्मक कार्रवाई थी। 

*स्वतंत्र भारत में जब राष्ट्रीय ध्वज पर विचार विमर्श किया जा रहा था, वह भीमराव अम्बेडकर “सविंधान ड्राफ्टिंग कमेटी” के अध्यक्ष ही थे। जिन्होंने राष्ट्रीय ध्वज में अशोक चक्र का सुझाव दिया था। उन्हीं की बदौलत आज तिरंगे में अशोक चक्र प्रदर्शित होता है।

* अम्बेडकर ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 370 का विरोध किया, जिसमें जम्मू-कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा दिया गया था और उनकी इच्छाओं के खिलाफ संविधान में शामिल किया गया था।

* भीमराव अम्बेडकर के दूसरे शोध ग्रंथ ‘ब्रिटिश भारत में प्रांतीय वित्त का विकास’ के आधार पर देश में वित्त आयोग की स्थापना हुई।

* उन्होंने अर्थशास्त्र पर तीन पुस्तकें लिखीं: एडमिनिस्ट्रेशन एंड फाइनेंस ऑफ दी इस्ट इंडिया कंपनी, द इव्हॅल्युएशन ऑफ प्रोविंशियल फाइनेंस इन ब्रिटिश इंडिया, द प्रॉब्लम ऑफ़ द रूपी : इट्स ओरिजिन एंड इट्स सोल्युशन।

* वर्ष 1950 के दशक में भीमराव अम्बेडकर बौद्ध धर्म के प्रति आकर्षित हुए और बौद्ध भिक्षुओं के सम्मेलनों में भाग लेने के लिए श्रीलंका (तब सिलोन) गए। और 14 अक्टूबर 1956 को नागपुर शहर में डॉ॰ भीमराव अम्बेडकर ने स्वयं और अपने समर्थकों के लिए एक औपचारिक सार्वजनिक धर्मांतरण समारोह का आयोजन किया। जिसमें सबसे पहले डॉ॰ अम्बेडकर ने अपनी पत्नी सविता एवं कुछ सहयोगियों के साथ भिक्षु महास्थवीर चंद्रमणी द्वारा पारंपरिक तरीके से त्रिरत्न और पंचशील को अपनाते हुए बौद्ध धर्म ग्रहण किया।

* 6 दिसम्बर 1956 को, अम्बेडकर का मधुमेह की लम्बी बीमारी से मृत्यु (महापरिनिर्वाण) दिल्ली में उनके घर में हो गई। हर साल 20 लाख से अधिक लोग उनकी जयंती (14 अप्रैल), महापरिनिर्वाण यानी पुण्यतिथि (6 दिसम्बर) और धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस (14 अक्टूबर) को चैत्यभूमि (मुंबई), दीक्षाभूमि (नागपूर) तथा भीम जन्मभूमि (महू) में उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए इकट्ठे होते हैं।

* अम्बेडकर के अनुयायियों द्वारा उन्हें आदर एवं सम्मान से ‘बाबासाहब’ (मराठी: बाबासाहेब) कहा जाता है, जो एक मराठी वाक्यांश है जिसका अर्थ “पिता-साहब”, क्योंकि लाखों भारतीय उन्हें “महान मुक्तिदाता” मानते हैं।

* बाबा साहेब को सम्मान देते हुए कई सार्वजनिक संस्थानों एवं ग्यारह विश्वविद्यालयों के नाम उनके नाम पर रखे गए, जैसे कि :- डॉ॰ बाबासाहेब अम्बेडकर अंतर्राष्ट्रीय विमानक्षेत्र, डॉ॰ बी॰आर॰ अम्बेडकर राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, जालंधर, अम्बेडकर विश्वविद्यालय, दिल्ली, इत्यादि शामिल है।

* भीमराव को हिस्ट्री टीवी 18 और सीएनएन आईबीएन द्वारा वर्ष 2012 में आयोजित एक चुनाव सर्वेक्षण “द ग्रेटेस्ट इंडियन” (महानतम भारतीय) में सर्वाधिक मत प्राप्त हुए थे। जिसमें लगभग 2 करोड़ मत डाले गए थे, इसके आधार पर उन्हें उस समय का सबसे लोकप्रिय भारतीय व्यक्ति माना जाने लगा।

* भीमराव अम्बेडकर की 125 वीं जयंती संयुक्त राष्ट्र संघ में मनाई गई थी, जहां संघ ने उन्हें ‘विश्व का प्रणेता’ कहां था। 

* वर्ष 2000 में, फिल्म निर्देशक जब्बार पटेल ने बाबा साहेब के जीवन चरित्र को प्रदर्शित करते हुए, एक फिल्म बनाई जिसका शीर्षक “डॉ॰ बाबासाहेब अम्बेडकर” था। 

* 14 अप्रैल 2015 को, गुगल ने अपने होमपेज डुडल के माध्यम से अम्बेडकर के 124 वें जन्मदिन का जश्न मनाया था। यह डूडल भारत, अर्जेंटीना, चिली, आयरलैंड, पेरू, पोलैंड, स्वीडन और यूनाइटेड किंगडम में दिखाया गया था।
Source:- https://hindi.starsunfolded.com/bhimrao-ramji-ambedkar-hindi/

👉डॉ बी. आर. अम्बेडकर के विचार :
• जीवन लम्बा होने की बजाय महान होना चाहिए।

• मैं किसी समुदाय की प्रगति, महिलाओं ने जो प्रगति हांसिल की है उससे मापता हूँ।

• एक सफल क्रांति के लिए सिर्फ असंतोष का होना पर्याप्त नहीं है। जिसकी आवश्यकता है वो है न्याय एवं राजनीतिक और सामाजिक अधिकारों में गहरी आस्था।

• लोग और उनके धर्म सामाजिक मानकों द्वारा; सामजिक नैतिकता के आधार पर परखे जाने चाहिए। अगर धर्म को लोगो के भले के लिए आवशयक मान लिया जायेगा तो और किसी मानक का मतलब नहीं होगा।

• हमारे पास यह स्वतंत्रता किस लिए है ? हमारे पास ये स्वत्नत्रता इसलिए है ताकि हम अपने सामाजिक व्यवस्था, जो असमानता, भेद-भाव और अन्य चीजों से भरी है, जो हमारे मौलिक अधिकारों से टकराव में है को सुधार सकें।

• सागर में मिलकर अपनी पहचान खो देने वाली पानी की एक बूँद के विपरीत, इंसान जिस समाज में रहता है वहां अपनी पहचान नहीं खोता। इंसान का जीवन स्वतंत्र है। वो सिर्फ समाज के विकास के लिए नहीं पैदा हुआ है, बल्कि स्वयं के विकास के लिए पैदा हुआ है।

• आज  भारतीय  दो  अलग -अलग  विचारधाराओं  द्वारा  शोषित  हो  रहे  हैं . उनके  राजनीतिक  आदर्श  जो  संविधान  के  प्रस्तावना  में  इंगित  हैं  वो  स्वतंत्रता  , समानता , और  भाई -चारे को  स्थापित  करते  हैं . और  उनके  धर्म  में  समाहित  सामाजिक  आदर्श  इससे  इनकार  करते  हैं

• राजनीतिक  अत्याचार  सामाजिक  अत्याचार  की  तुलना  में  कुछ  भी  नहीं  है  और  एक  सुधारक  जो  समाज  को  खारिज  कर  देता  है  वो   सरकार  को  ख़ारिज  कर  देने  वाले   राजनीतिज्ञ  से  कहीं अधिक  साहसी  हैं


 बी. आर. अम्बेडकर का जीवन परिचय पढ़ने ले लिए दिए क्लिक करें

👉https://www.quickhindi.in/2020/04/dr-bhimrao-ambedkar-biography-in-hindi.html
👉 https://www.bharatdarshan.co.nz/magazine/article/child/170/ambedkar-biography.html
👉 https://www.1hindi.com/dr-bhimrao-ambedkar-life-history-hindi/

Wednesday, April 1, 2026

Pustakopahaar 2026

Pustakopahaar- 2026

Pustakopahar 2026 was successfully organized at PM SHRI Kendriya Vidyalaya No. 1 Udhampur under the able guidance of the Principal, Swati Bansal. The programme was conducted with great enthusiasm and aimed at promoting reading habits, encouraging the sharing of books, and creating environmental awareness among students.

As part of this initiative, students donated their used textbooks, storybooks, and reference materials in good condition. These books were systematically collected and distributed among junior and economically disadvantaged students. In addition, teachers conducted awareness sessions highlighting the importance of reading and the judicious use and reuse of resources.

The programme witnessed active and enthusiastic participation from students, teachers, and the school library. It helped in inculcating values such as sharing, compassion, and social responsibility among students. The Principal appreciated the sincere efforts of all participants and commended them for contributing to this noble cause.

In conclusion, Pustakopahar 2026 was conducted successfully and proved to be an effective initiative in promoting knowledge, cooperation, and sustainability within the school community.


Glimpses of Pustakopahar 2026











Pustakopahar Statistics :

No of students participated- 112

No of books exchanged-640

LIBRARIAN 

परीक्षा पर चर्चा 2023-24